गांव का इतिहास

सारसा में आपका स्वागत है, यह कुरुक्षेत्र, हरियाणा का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध गाँव है। पवित्र शालिहोत्र तीर्थ के लिए प्रसिद्ध सारसा का प्रबंधन 1980 से महंत श्री चंद्रिका दास जी महाराज द्वारा किया जा रहा है। मान्यता है कि यक्ष सरस् ने युधिष्ठिर की परीक्षा यहीं ली थी, और उनकी बुद्धिमत्ता से उनके चारों भाई पुनर्जीवित हुए थे। इसी कथा से इस गाँव का ऐतिहासिक नाम पड़ा।

आज सारसा प्रशासनिक रूप से चार पट्टियों में विभाजित है— भोजू पट्टी, जस्सो पट्टी, धिंगर पट्टी और तिलाही पट्टी

🌿 हमारे गाँव की खास बातें


🎓 शिक्षा सुविधाएँ

  • सरकारी स्कूल – 2

  • आंगनवाड़ी केंद्र – 2


🏡 सार्वजनिक स्थान व सुविधाएँ

  • 80 किलो की बड़ी चिलचिला (चिलचा)
    – रोड़ा नाथ का मंदिर
    – वन विभाग द्वारा लगाए गए कई प्रकार के पेड़

  • चौपाल – 7 (जिनमें से 4 सक्रिय)

  • सरकारी पशु अस्पताल – 1

  • सरकारी डिस्पेंसरी – 2

  • आधार कार्ड सेंटर – 1

  • खेल नर्सरी – 1

  • बड़ा खेल मैदान – 1

  • सर्व ग्रामीण बैंक – 1

  • जिम – 2


🛕 धार्मिक स्थल

  • बड़ा शिव मंदिर और राम मंदिर

  • दादा खेड़े – 2

  • जितगर बाबा

  • माड़ी

  • मस्जिद – 1

  • गुरुद्वारा – 1

  • गोगा पीर

  • बसंती माता और बाहरली माता

  • बूढ़ी माता

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